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Lodhra(Symplocos racemosa)

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लोध्र (Lodhra)

1. सामान्य परिचय

हिंदी नाम: लोध्र, लोध
संस्कृत नाम: लोध्र, तिल्वक, शाबर, पट्टिका
अंग्रेज़ी नाम: Lodh Tree, Symplocos
वानस्पतिक नाम: Symplocos racemosa Roxb.
कुल (Family): Symplocaceae

लोध्र (Symplocos racemosa) आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पति है, जिसका प्रमुख उपयोग स्त्री स्वास्थ्य, त्वचा स्वास्थ्य, रक्तस्राव संबंधी पारंपरिक योगों तथा सूजन से जुड़े आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में किया जाता है। इसकी छाल (Bark) औषधीय रूप से सबसे अधिक प्रयुक्त भाग है।

आयुर्वेद में लोध्र को कषाय, शीतल, ग्राही, शोथहर एवं रक्तस्तम्भक गुणों वाली औषधि माना जाता है। यह विशेष रूप से प्रदर, अत्यधिक स्राव, त्वचा संबंधी समस्याओं तथा स्त्री-स्वास्थ्य से जुड़े पारंपरिक योगों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

2. अन्य प्रचलित नाम

भाषा नाम
संस्कृत लोध्र, तिल्वक
हिंदी लोध्र, लोध
अंग्रेज़ी Lodh Tree
मराठी लोध्र
गुजराती લોધ્ર
बंगाली লোধ
तमिल லோத்ரம் (Lodhram)
तेलुगु లోధ్ర (Lodhra)
कन्नड़ ಲೋಧ್ರ (Lodhra)
मलयालम പച്ചോറ്റി (Pachotti)

3. पौधे का परिचय

लोध्र एक मध्यम आकार का सदाबहार या अर्ध-सदाबहार वृक्ष है, जिसकी ऊँचाई सामान्यतः 6–15 मीटर तक हो सकती है। इसकी छाल भूरे या धूसर रंग की होती है। इसमें छोटे सफेद या हल्के पीले फूल तथा फल पाए जाते हैं।

औषधीय उपयोग के लिए मुख्यतः इसकी तने की छाल (Stem Bark) का उपयोग किया जाता है।

4. प्राकृतिक वितरण एवं खेती

  • मूल क्षेत्र: भारतीय उपमहाद्वीप एवं दक्षिण-पूर्व एशिया
  • भारत में वितरण: हिमालय की तलहटी, उत्तर-पूर्व भारत, मध्य भारत तथा दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में
  • उपयुक्त जलवायु: उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय
  • मिट्टी: नम, उपजाऊ एवं अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी
  • आवास: वन क्षेत्रों एवं पर्वतीय ढलानों पर प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।

5. उपयोगी भाग (Parts Used)

  • तने की छाल (Stem Bark) – मुख्य औषधीय भाग
  • पत्तियाँ (Leaves)
  • बीज (Seeds)
  • फूल (Flowers)

औषधीय कच्चे माल के रूप में लोध्र छाल चूर्ण (Lodhra Bark Powder) सबसे अधिक प्रचलित है।

6. प्रमुख रासायनिक घटक (Active Constituents)

लोध्र की छाल में विभिन्न जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • Loturine
  • Colloturine
  • Symplocosin
  • Alkaloids
  • Tannins
  • Flavonoids
  • Phenolic Compounds
  • Glycosides
  • Steroidal Constituents

इसमें उपस्थित Tannins एवं Alkaloids इसके पारंपरिक कसैले (Astringent) गुणों में योगदान कर सकते हैं।

7. आयुर्वेदिक गुणधर्म

गुणधर्म विवरण
रस कषाय
गुण लघु, रुक्ष
वीर्य शीत
विपाक कटु
दोष प्रभाव पित्त एवं कफ शामक

8. पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग

आयुर्वेद में लोध्र का उपयोग विशेष रूप से—

  • स्त्री स्वास्थ्य संबंधी पारंपरिक योगों में
  • प्रदर एवं अत्यधिक स्राव संबंधी योगों में
  • रक्तस्तम्भक (रक्तस्राव नियंत्रित करने वाले) फॉर्मूलेशन में
  • त्वचा की देखभाल में
  • शोथ संबंधी पारंपरिक प्रयोगों में
  • कषाय एवं ग्राही योगों में
  • चूर्ण, क्वाथ एवं बहु-हर्बल फॉर्मूलेशन में

किया जाता है।

9. संभावित स्वास्थ्य एवं कॉस्मेटिक लाभ

1. स्त्री स्वास्थ्य का पारंपरिक समर्थन

लोध्र आयुर्वेद में स्त्री स्वास्थ्य संबंधी कई पारंपरिक योगों का महत्वपूर्ण घटक है। इसका उपयोग विशेष रूप से अत्यधिक स्राव एवं प्रदर से संबंधित फॉर्मूलेशन में किया जाता है।

2. रक्तस्तम्भक एवं ग्राही गुण

इसकी कषाय प्रकृति के कारण पारंपरिक आयुर्वेद में इसे ग्राही एवं रक्तस्तम्भक औषधि के रूप में वर्णित किया जाता है।

3. त्वचा स्वास्थ्य

लोध्र का उपयोग पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल एवं विभिन्न हर्बल लेपों में किया जाता है।

4. सूजन संबंधी उपयोग

इसके विभिन्न जैव सक्रिय घटकों पर anti-inflammatory activity का प्रारंभिक अध्ययन किया गया है।

5. एंटीऑक्सीडेंट गुण

इसमें उपस्थित tannins, flavonoids एवं phenolic compounds antioxidant activity प्रदर्शित कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक उपयोगों एवं उपलब्ध प्रारंभिक वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का प्रमाणित दावा नहीं माना जाना चाहिए।

10. आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन

Symplocos racemosa पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गतिविधियों का अध्ययन किया गया है—

  • Antioxidant Activity
  • Anti-inflammatory Activity
  • Antimicrobial Activity
  • Astringent Potential
  • Wound-healing Potential
  • Female Reproductive Health Applications
  • Phytochemical Analysis

इन प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

11. उपयोग की विधियाँ

लोध्र का उपयोग पारंपरिक रूप से—

  • लोध्र छाल चूर्ण
  • क्वाथ (काढ़ा)
  • हर्बल लेप
  • फेस पैक
  • बाह्य त्वचा फॉर्मूलेशन
  • स्त्री स्वास्थ्य संबंधी बहु-हर्बल योग
  • आयुर्वेदिक चूर्ण एवं टैबलेट

में किया जाता है।

त्वचा संबंधी उपयोग

लोध्र चूर्ण को विभिन्न हर्बल पाउडरों के साथ मिलाकर पारंपरिक फेस पैक एवं लेप में उपयोग किया जाता है। कॉस्मेटिक फॉर्मूलेशन में इसकी कषाय प्रकृति त्वचा को कसाव देने वाले (Astringent) उत्पादों में उपयोगी हो सकती है।

12. सामान्य मात्रा

लोध्र की मात्रा उपयोग के उद्देश्य एवं तैयारी के अनुसार बदलती है।

  • छाल चूर्ण: 3–6 ग्राम प्रतिदिन, चिकित्सकीय सलाह अनुसार
  • क्वाथ: 30–50 मि.ली., चिकित्सकीय निर्देशानुसार
  • अर्क (Extract): उत्पाद के मानकीकरण एवं लेबल के अनुसार

स्त्री स्वास्थ्य या रक्तस्राव संबंधी समस्याओं में स्वयं से सेवन नहीं करना चाहिए

13. सावधानियाँ

  • चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही आंतरिक सेवन करें।
  • गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान उपयोग से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें।
  • अत्यधिक मासिक रक्तस्राव, अनियमित रक्तस्राव या अन्य स्त्री-रोग संबंधी समस्या में पहले चिकित्सकीय जाँच आवश्यक है।
  • यदि नियमित दवाएँ चल रही हों, तो चिकित्सक को सूचित करें।
  • निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन न करें।
  • केवल प्रमाणित एवं सही botanical identification वाले लोध्र का उपयोग करें।

14. भंडारण

  • छाल चूर्ण को ठंडी एवं सूखी जगह पर रखें।
  • नमी एवं सीधी धूप से बचाएँ।
  • एयरटाइट कंटेनर में रखें।
  • लंबे समय तक संग्रहित करने पर रंग, गंध एवं नमी की स्थिति की जाँच करें।

15. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

लोध्र का Botanical Name क्या है?

लोध्र का वैज्ञानिक नाम Symplocos racemosa Roxb. है।

लोध्र का मुख्य औषधीय भाग कौन-सा है?

मुख्यतः तने की छाल (Stem Bark) का उपयोग किया जाता है।

लोध्र का आयुर्वेद में मुख्य उपयोग क्या है?

इसका पारंपरिक उपयोग स्त्री स्वास्थ्य, प्रदर, ग्राही एवं रक्तस्तम्भक योगों तथा त्वचा की देखभाल में किया जाता है।

लोध्र में कौन-से प्रमुख सक्रिय घटक पाए जाते हैं?

इसमें Loturine, Colloturine, Symplocosin, Tannins, Flavonoids एवं Phenolic Compounds पाए जाते हैं।

क्या लोध्र त्वचा की देखभाल में उपयोगी है?

हाँ। इसका उपयोग पारंपरिक रूप से हर्बल लेप, फेस पैक एवं त्वचा संबंधी फॉर्मूलेशन में किया जाता है।

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अस्वीकरण (Disclaimer)

यह जानकारी आयुर्वेदिक परंपरा एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार या रोकथाम का विकल्प नहीं है। विशेष रूप से रक्तस्राव या स्त्री-रोग संबंधी समस्याओं में स्वयं से औषधि का सेवन न करें। किसी भी हर्बल औषधि का उपयोग योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।

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