हिंदी नाम: लोध्र, लोध
संस्कृत नाम: लोध्र, तिल्वक, शाबर, पट्टिका
अंग्रेज़ी नाम: Lodh Tree, Symplocos
वानस्पतिक नाम: Symplocos racemosa Roxb.
कुल (Family): Symplocaceae
लोध्र (Symplocos racemosa) आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पति है, जिसका प्रमुख उपयोग स्त्री स्वास्थ्य, त्वचा स्वास्थ्य, रक्तस्राव संबंधी पारंपरिक योगों तथा सूजन से जुड़े आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में किया जाता है। इसकी छाल (Bark) औषधीय रूप से सबसे अधिक प्रयुक्त भाग है।
आयुर्वेद में लोध्र को कषाय, शीतल, ग्राही, शोथहर एवं रक्तस्तम्भक गुणों वाली औषधि माना जाता है। यह विशेष रूप से प्रदर, अत्यधिक स्राव, त्वचा संबंधी समस्याओं तथा स्त्री-स्वास्थ्य से जुड़े पारंपरिक योगों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
| भाषा | नाम |
|---|---|
| संस्कृत | लोध्र, तिल्वक |
| हिंदी | लोध्र, लोध |
| अंग्रेज़ी | Lodh Tree |
| मराठी | लोध्र |
| गुजराती | લોધ્ર |
| बंगाली | লোধ |
| तमिल | லோத்ரம் (Lodhram) |
| तेलुगु | లోధ్ర (Lodhra) |
| कन्नड़ | ಲೋಧ್ರ (Lodhra) |
| मलयालम | പച്ചോറ്റി (Pachotti) |
लोध्र एक मध्यम आकार का सदाबहार या अर्ध-सदाबहार वृक्ष है, जिसकी ऊँचाई सामान्यतः 6–15 मीटर तक हो सकती है। इसकी छाल भूरे या धूसर रंग की होती है। इसमें छोटे सफेद या हल्के पीले फूल तथा फल पाए जाते हैं।
औषधीय उपयोग के लिए मुख्यतः इसकी तने की छाल (Stem Bark) का उपयोग किया जाता है।
औषधीय कच्चे माल के रूप में लोध्र छाल चूर्ण (Lodhra Bark Powder) सबसे अधिक प्रचलित है।
लोध्र की छाल में विभिन्न जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
इसमें उपस्थित Tannins एवं Alkaloids इसके पारंपरिक कसैले (Astringent) गुणों में योगदान कर सकते हैं।
| गुणधर्म | विवरण |
| रस | कषाय |
| गुण | लघु, रुक्ष |
| वीर्य | शीत |
| विपाक | कटु |
| दोष प्रभाव | पित्त एवं कफ शामक |
आयुर्वेद में लोध्र का उपयोग विशेष रूप से—
किया जाता है।
लोध्र आयुर्वेद में स्त्री स्वास्थ्य संबंधी कई पारंपरिक योगों का महत्वपूर्ण घटक है। इसका उपयोग विशेष रूप से अत्यधिक स्राव एवं प्रदर से संबंधित फॉर्मूलेशन में किया जाता है।
इसकी कषाय प्रकृति के कारण पारंपरिक आयुर्वेद में इसे ग्राही एवं रक्तस्तम्भक औषधि के रूप में वर्णित किया जाता है।
लोध्र का उपयोग पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल एवं विभिन्न हर्बल लेपों में किया जाता है।
इसके विभिन्न जैव सक्रिय घटकों पर anti-inflammatory activity का प्रारंभिक अध्ययन किया गया है।
इसमें उपस्थित tannins, flavonoids एवं phenolic compounds antioxidant activity प्रदर्शित कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक उपयोगों एवं उपलब्ध प्रारंभिक वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का प्रमाणित दावा नहीं माना जाना चाहिए।
Symplocos racemosa पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गतिविधियों का अध्ययन किया गया है—
इन प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।
लोध्र का उपयोग पारंपरिक रूप से—
में किया जाता है।
लोध्र चूर्ण को विभिन्न हर्बल पाउडरों के साथ मिलाकर पारंपरिक फेस पैक एवं लेप में उपयोग किया जाता है। कॉस्मेटिक फॉर्मूलेशन में इसकी कषाय प्रकृति त्वचा को कसाव देने वाले (Astringent) उत्पादों में उपयोगी हो सकती है।
लोध्र की मात्रा उपयोग के उद्देश्य एवं तैयारी के अनुसार बदलती है।
स्त्री स्वास्थ्य या रक्तस्राव संबंधी समस्याओं में स्वयं से सेवन नहीं करना चाहिए।
लोध्र का वैज्ञानिक नाम Symplocos racemosa Roxb. है।
मुख्यतः तने की छाल (Stem Bark) का उपयोग किया जाता है।
इसका पारंपरिक उपयोग स्त्री स्वास्थ्य, प्रदर, ग्राही एवं रक्तस्तम्भक योगों तथा त्वचा की देखभाल में किया जाता है।
इसमें Loturine, Colloturine, Symplocosin, Tannins, Flavonoids एवं Phenolic Compounds पाए जाते हैं।
हाँ। इसका उपयोग पारंपरिक रूप से हर्बल लेप, फेस पैक एवं त्वचा संबंधी फॉर्मूलेशन में किया जाता है।
लोध्र (Symplocos racemosa) – फायदे, उपयोग, गुण एवं Botanical Name
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यह जानकारी आयुर्वेदिक परंपरा एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार या रोकथाम का विकल्प नहीं है। विशेष रूप से रक्तस्राव या स्त्री-रोग संबंधी समस्याओं में स्वयं से औषधि का सेवन न करें। किसी भी हर्बल औषधि का उपयोग योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।